समय पर मिली क्रिटिकल केयर से महिला की जान बची


समय पर मिली क्रिटिकल केयर से महिला की जान बची
– हेडरी स्थित लॉयड्स काली अम्मल मेमोरियल हॉस्पिटल की उल्लेखनीय चिकित्सकीय सफलता
The गडविश्व
गडचिरोली, दि. 20 : दुर्गम और आदिवासी बहुल गडचिरोली जिले में भी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और समय पर उपचार कितने जीवनरक्षक साबित हो सकते हैं, इसका सशक्त उदाहरण हेडरी स्थित लॉयड्स काली अम्मल मेमोरियल हॉस्पिटल में हाल ही में देखने को मिला। पारसलगुंडी गांव की एक मध्यम आयु की महिला, जो ऑर्गेनोफॉस्फरस विषाक्तता के कारण अत्यंत गंभीर अवस्था में थी, को समय पर और उन्नत क्रिटिकल केयर देकर डॉक्टरों ने नया जीवन दिया।
28 दिसंबर 2025 को उक्त महिला को बेहोशी की हालत में, सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ और फेफड़ों में गंभीर जटिलताओं के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने ऑर्गेनोफॉस्फरस विषाक्तता का निदान करते हुए तत्काल आपातकालीन जीवनरक्षक उपचार शुरू किया। मरीज की स्थिति नाजुक होने के कारण उसे इंट्यूबेट कर आईसीयू में भर्ती किया गया और मैकेनिकल वेंटिलेटर पर रखा गया। लंबे समय तक वेंटिलेटर पर निर्भर रहने के कारण बाद में ट्रेकियोस्टॉमी भी करनी पड़ी।
लगातार 15 दिनों तक आईसीयू में इलाज के दौरान विषाक्तता के दुष्प्रभाव मस्तिष्क, हृदय और फेफड़ों पर दिखाई दिए। मरीज को तीव्र फेफड़ों में सूजन (एक्यूट पल्मोनरी एडिमा) हुई, साथ ही सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया (SVT) के दो दौरे भी पड़े, जिससे उसकी हालत और गंभीर हो गई। इस पूरे समय में निरंतर निगरानी, आधुनिक उपकरणों और उन्नत क्रिटिकल केयर की अत्यंत आवश्यकता रही।
सभी जटिलताओं के बावजूद मरीज ने धीरे-धीरे उपचार का सकारात्मक प्रतिसाद दिया। बहुविषयक विशेषज्ञों के समन्वित और सतत प्रयासों के चलते अंततः उसे सुरक्षित रूप से वेंटिलेटर से हटाया गया। स्थिति स्थिर होने के बाद सभी जीवन संकेत सामान्य पाए जाने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इस उपचार का नेतृत्व मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. चेतन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. धीरज तथा ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. महेंद्र ने किया। संपूर्ण उपचार प्रक्रिया वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गोपाल रॉय के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
अस्पताल प्रशासन ने गडचिरोली जैसे दुर्गम क्षेत्र में अत्याधुनिक क्रिटिकल केयर सुविधाओं से युक्त अस्पताल की स्थापना के लिए एलएमईएल के प्रबंध निदेशक बी. प्रभाकरन के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही निदेशिका कीर्ति रेड्डी के निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन के लिए कृतज्ञता जताई।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि समय पर उपचार, आधुनिक चिकित्सा अवसंरचना और टीमवर्क के बल पर दुर्गम व वंचित क्षेत्रों में भी गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

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