गढ़चिरौली में जलसंकट रोकने के लिए प्रशासन एक्शन मोड में
– 36 संवेदनशील गांवों पर विशेष ध्यान; 76 गांवों के लिए 4.35 करोड़ रुपये की 86 उपाययोजनाओं का खाका तैयार
The गढ़विश्व
गढ़चिरौली, 14 : संभावित जलसंकट से निपटने के लिए गढ़चिरौली जिला प्रशासन ने अभी से उपाययोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। भूजल स्तर में गिरावट वाले 36 संवेदनशील गांवों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वहीं, पहले चरण में 76 गांवों के लिए लगभग 4 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत वाली 86 उपाययोजनाओं का खाका तैयार किया गया है। गांववार जल उपलब्धता की समीक्षा कर जलसंकट उत्पन्न होने से पहले ही आवश्यक प्रतिबंधात्मक उपाय लागू किए जाएं, ऐसे निर्देश जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा ने दिए।
जिलाधिकारी कार्यालय में संभावित जलसंकट और उससे निपटने के लिए प्रस्तावित उपाययोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी पंडा ने संबंधित विभागों को जलस्रोतों की स्थिति का आकलन कर समय रहते आवश्यक कार्य पूरे करने के निर्देश दिए। इस दौरान जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे, निवासी उपजिलाधिकारी आशीष वानखेड़े, ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता विनोद उद्धरवार, जिला जलसंधारण अधिकारी सावन जयस्वाल तथा सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता राहुल मोरघड़े उपस्थित थे। जिले के उपविभागीय अधिकारी, तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
पांच तहसीलों के 36 गांवों में भूजल स्तर गिरा
भूजल सर्वेक्षण एवं विकास एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, चामोर्शी, एटापल्ली, धानोरा, अहेरी और मुलचेरा तहसीलों के 36 गांवों में भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। इन गांवों में जलस्रोतों की मौजूदा स्थिति, उपलब्ध जलभंडार और भविष्य की जरूरतों का प्रत्यक्ष निरीक्षण कर विशेष उपाययोजनाएं निर्धारित करने के निर्देश जिलाधिकारी ने दिए।
पंचायत समितियों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर 76 गांवों के लिए 86 कार्यों की योजना तैयार की गई है। इन पर लगभग 4.35 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। प्रस्तावित कार्यों में बोरवेल की खुदाई, कुओं का गहरीकरण तथा नल जलापूर्ति योजनाओं की विशेष मरम्मत शामिल है। जिलाधिकारी ने कहा कि गांवों की जल जरूरत और संभावित संकट की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए कार्यों की प्राथमिकता तय की जाए। साथ ही, मंजूरी की प्रक्रिया पूरी कर काम जल्द शुरू किए जाएं।
पेयजल स्रोतों के 500 मीटर दायरे में अवैध बोरवेल पर रोक
पेयजल स्रोतों के 500 मीटर के दायरे में अनधिकृत बोरवेल की खुदाई पर लागू प्रतिबंधों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। निजी बोरवेल से अत्यधिक जल दोहन के कारण सार्वजनिक जलस्रोत प्रभावित न हों, इसके लिए राजस्व और पुलिस प्रशासन को संयुक्त रूप से निगरानी करने को कहा गया है। बिना अनुमति बोरवेल की खुदाई करने वाले वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें जब्त करने के निर्देश भी जिलाधिकारी ने दिए।
शासन की ओर से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति में 10 प्रतिशत कटौती लागू की गई है। इसके अनुरूप स्थानीय प्रशासन को पानी के वितरण की योजना बनाने को कहा गया है। उपलब्ध पानी का किफायत से उपयोग करने के साथ ही जलापूर्ति व्यवस्था में रिसाव और पानी की बर्बादी रोकने पर जोर दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा से संचालित ड्यूल पंपों के नलों में टोंटियां लगाने और रिसाव की मरम्मत करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपी गई है।
105 गांवों में जलस्रोतों को मजबूत करने की योजना
जिले में जलस्रोतों की दीर्घकालिक स्थिरता बढ़ाने के लिए 105 गांवों का जलस्रोत सुदृढ़ीकरण खाका तैयार किया जा रहा है। इसके तहत 140 रिचार्ज शाफ्ट, नालों का गहरीकरण, गैबियन बंधारे और जल सोखने वाले गड्ढों जैसे कार्य प्रस्तावित हैं। जिला नियोजन समिति और जलसंधारण विभाग के माध्यम से इन कार्यों का एकीकृत नियोजन कर भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
खेती में पानी के उपयोग का भी होगा नियोजन
जिलाधिकारी ने कृषि कार्यों के लिए उपलब्ध पानी का आकलन कर जल बजट तैयार करने के निर्देश भी दिए। गर्मियों में धान की खेती के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में उपलब्ध जलभंडार और पेयजल की जरूरत को ध्यान में रखकर फसल नियोजन करने की सलाह दी गई।
कृषि विभाग को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कम पानी में उगने वाली दलहनी फसलों सहित वैकल्पिक फसलों को अपनाने तथा सूक्ष्म सिंचाई का उपयोग बढ़ाने के लिए किसानों का मार्गदर्शन करने और जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों को गांवों का दौरा करने के निर्देश
जिन गांवों में जलसंकट की आशंका अधिक है, वहां उपविभागीय अधिकारी, तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी संयुक्त रूप से दौरा कर वास्तविक स्थिति का जायजा लेंगे और आवश्यक उपाययोजनाएं तय करेंगे।
जिलाधिकारी अविश्यांत पंडा ने स्पष्ट किया कि जिले के किसी भी गांव में पेयजल संकट की स्थिति गंभीर नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से प्रस्तावित कार्यों को समय पर पूरा करें और जलापूर्ति की स्थिति की नियमित समीक्षा करें।

